विद्यां ददाति विनयं, विनयाद् याति पात्रताम् । पात्रत्वात् धनमाप्नोति, धनात् धर्मं ततः सुखम् ॥ हिन्दी भावार्थ:
विद्या विनय देती है, विनय से पात्रता आती है, पात्रता से धन आता है, धन से धर्म होता है, और धर्म से सुख प्राप्त होता है। किन्तु कौटिल्य ने बताया है की विद्या से विनय के अतिरिक्त और भी गुण आते हैं जो इस प्रकार हैं |Rohi Thasil- GYANPUR Disst- BHADOHI
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